About Mahotsav

इस जनपद के भू-भाग का इतिहास अत्यन्त ही गौरवशाली है। सर्वविदित है कि कपिलवस्तु शाक्य गणराज्य की राजधानी थी। गौतम बुद्ध (बाल्यकाल का नाम सिद्धार्थ) के पिता शुद्धोधन यहां के राजा थे। अतीत में वनों से आच्छादित हिमालय की तलहटी का यह क्षेत्र साकेत अथवा कौशल राज्य का हिस्सा था। ईसा पूर्व छठी शताब्दी में शाक्यों ने अपनी राजधानी कपिलवस्तु में बनायी और यहाॅ एक शक्तिशाली गणराज्य की स्थापना की। काल के थपेड़े से यह क्षेत्र फिर उजाड़ हो गया। अंग्रेजी शासन में जमींदारों ने यहाॅ पर पैर जमाया। सन् 1865 में गोरखपुर से पृथक बस्ती जिले के सृजन के बाद यह क्षेत्र बस्ती जिले में आ गया। 29 दिसम्बर 1988 को राजकुमार सिद्धार्थ के नाम पर जनपद बस्ती के उत्तरी भाग को पृथक कर सिद्धार्थनगर जिले का सृजन किया गया। जनपद स्थापना दिवस-29 दिसम्बर को लक्षित करके ”कपिलवस्तु महोत्सव“ सर्वप्रथम आयोजन वर्ष 1992 में हुआ, तभी से अनवरत कपिलवस्तु महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस महोत्सव का आयोजन कुछेक वर्षो को छोड़कर प्रायः तीन दिवसीय रहा है। परन्तु वर्ष 2017 में जनमानस की भावनाओं के दृष्टिगत एवं श्री कुणाल सिल्कू जिलाधिकारी, सिद्धार्थनगर की दृढ़ इच्छा शक्ति से दिनांक 25 दिसम्बर 2017 से 31 दिसम्बर 2017 तक सात दिवसीय महोत्सव मा0 मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी, मा0 जनपद प्रभारी मंत्री श्री चेतन चैहान जी, मा0 मंत्री आबकारी एवं मद्य निषेध श्री जय प्रताप सिंह, मा0 सांसद डुमरियागंज श्री जगदम्बिका पाल, मा0 विधायक कपिलवस्तु श्री श्यामधनी राही, मा0 विधायक डुमरियागंज श्री राघवेन्द्र प्रताप सिंह, मा0 विधायक इटवा डा0 सतीष चन्द्र द्विवेदी, मा0 विधायक शोहरतगढ़ श्री अमर सिंह चैधरी एवं अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थित के साथ सफलतापूर्वक आयोजन हुआ।

मा0 मुख्यमंत्री जी की प्रेरणा एवं मा0 जनप्रतिनिधियों के अपार सहयोग से “कपिलवस्तु महोत्सव“ उत्तरोत्तर नये आयाम को प्राप्त करने हेतु दृढ़ संकल्प है।